कभी-कभी घर में बिना वजह रुकावटें मन की बेचैनी या काम बनते-बनते अटकना ऐसी बातें लोग पितृ दोष या पितरों की असंतुष्टि से जोड़कर देखते हैं। Mauni Amavasya 2026 इसी वजह से बहुत खास मानी जाती है, क्योंकि यह दिन माघ मास की अमावस्या होती है और सनातन धर्म में इसे अत्यंत पवित्र व पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और जीवन की नकारात्मकता कम होती है। इसी दिन माघ मेले का तीसरा प्रमुख स्नान पर्व भी होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं।
Mauni Amavasya 2026 का महत्व: मौन, स्नान और पितरों की शांति का पावन दिन
Mauni Amavasya 2026 को मौनी अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन मौन साधना का विशेष महत्व बताया गया है। मौन का मतलब केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि मन को भी शांत करना है। माना जाता है कि जब मन शांत होता है, तब पूजा-पाठ, तर्पण और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। माघ मास में वैसे भी स्नान-दान का अलग पुण्य माना गया है, और अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी मानी जाती है।
इस दिन स्नान के बाद पितरों के नाम से तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पितरों को संतोष मिलता है और वे वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। आज के समय में भी बहुत लोग इस दिन परिवार की याद के तौर पर पितरों के लिए प्रार्थना करते हैं, जरूरतमंदों को दान देते हैं और अपने व्यवहार में संयम रखते हैं। यही वजह है कि यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों को जोड़ता है।
गंगा स्नान और दान का असर: पाप शांति, पितृ दोष में राहत और जीवन में सकारात्मकता
ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से जाने-अनजाने किए गए पापों का क्षय माना जाता है और पितृ दोष के प्रभाव शांत हो सकते हैं। अगर किसी कारण से गंगा तट तक जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करने को भी गंगा स्नान के समान पुण्य फल देने वाला बताया गया है।
स्नान के बाद सबसे जरूरी काम है पितरों के नाम से तर्पण, और फिर श्रद्धा के साथ दान-पुण्य। इस दिन सफेद वस्त्र, कंबल, अनाज या गर्म कपड़ों का दान विशेष शुभ माना जाता है। इसका उद्देश्य भी सीधा है अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद की मदद और पितरों की स्मृति में पुण्य कर्म। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और मन को भी एक अलग शांति मिलती है। अगर आप Mauni Amavasya 2026 को सच में सार्थक बनाना चाहते हैं, तो स्नान के बाद कुछ देर मौन रहकर दान का संकल्प जरूर लें।
तर्पण का सही तरीका: कुश, अक्षत, काले तिल और ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जप

मौनी अमावस्या के दिन पितरों के लिए उपाय करते समय विधि के साथ भाव भी बहुत मायने रखता है। स्नान के बाद एक पात्र में जल लें और उसमें कुश, अक्षत (चावल) और काले तिल मिला दें। फिर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के लिए जल अर्पित करें। तर्पण करते समय श्रद्धा भाव से ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का कम-से-कम 11 बार जप करने की सलाह दी गई है।
इसके साथ ही इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यदि संभव हो, तो हरिद्वार, गया, प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थस्थलों पर दान-पुण्य करना विशेष फल देने वाला बताया जाता है। कई परिवार इस दिन अपने बुजुर्गों के नाम से दान करके आशीर्वाद की भावना को आगे बढ़ाते हैं। ध्यान रहे, Mauni Amavasya 2026 पर तर्पण करते समय दिखावा नहीं, सादगी और श्रद्धा सबसे बड़ी बात है क्योंकि यही भाव पितरों की शांति के लिए सबसे मजबूत आधार माना जाता है।
पीपल पूजा का खास उपाय: दीपक, दूध-गंगाजल और 7 परिक्रमा से घर में शांति
हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है। इसलिए Mauni Amavasya 2026 के दिन संध्या काल में पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद पीपल की जड़ में दूध और गंगाजल अर्पित करें और पितरों की शांति के लिए मन से प्रार्थना करें।
फिर 7 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें। परिक्रमा के दौरान बस एक ही बात मन में रखें मेरे पूर्वज जहां भी हों, उन्हें शांति मिले और हमारे घर पर उनकी कृपा बनी रहे। मान्यता है कि इस उपाय से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। बहुत लोग इसे एक तरह से ध्यान की तरह भी करते हैं, जिससे मन हल्का होता है और रिश्तों में भी नरमी आती है। अगर आप इस दिन ज्यादा कुछ नहीं कर पाएं, तो भी पीपल पूजा और एक छोटा सा दान ये दो काम Mauni Amavasya 2026 को अर्थपूर्ण बना सकते हैं।
मौनी अमावस्या 2026 कब है: तिथि, दिन और अमावस्या का समय
Mauni Amavasya 2026 (माघ मास की अमावस्या) 18 जनवरी 2026, रविवार को है।
- अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 17 जनवरी 2026 की रात 11:53 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2026 की रात 01:08 बजे
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, फिर तर्पण-दान, और संध्या में पीपल पूजा यह क्रम आमतौर पर सबसे अधिक प्रचलित माना जाता है।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी परिस्थिति, स्वास्थ्य और स्थानीय परंपराओं के अनुसार निर्णय लें। यदि आप किसी विशेष पूजा-विधि को लेकर असमंजस में हों, तो योग्य पंडित/ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना बेहतर है।
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