Jaya Parvati Vrat 2026: 27 जुलाई से शुरू हुआ पांच दिवसीय व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नियम और धार्मिक महत्व

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Jaya Parvati Vrat 2026 की शुरुआत सोमवार, 27 जुलाई 2026 से हो गई है। यह पवित्र व्रत लगातार पांच दिनों तक चलता है और 31 जुलाई 2026 को इसका समापन होगा। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, खासकर गुजरात में इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को पूरी आस्था और नियमों के साथ करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए और अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

Jaya Parvati Vrat 2026 कब से शुरू हुआ?

जया पार्वती व्रत 2026 की शुरुआत 27 जुलाई, सोमवार से हो चुकी है। यह व्रत लगातार पांच दिनों तक किया जाता है और 31 जुलाई को इसका पारण किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन पांच दिनों तक नियमपूर्वक व्रत करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई स्थानों पर महिलाएं रोजाना पूजा के साथ शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप भी करती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

27 जुलाई 2026 का पंचांग और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 4 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। वैकृति योग रात 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। सुबह 10 बजकर 29 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:46 से 5:30 बजे तक, प्रातः संध्या 5:08 से 6:14 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:19 से 1:11 बजे तक, विजय मुहूर्त 2:55 से 3:48 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:16 से 7:38 बजे तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 5:36 बजे और सूर्यास्त शाम 7:14 बजे होगा।

Jaya Parvati Vrat 2026 का धार्मिक महत्व

जया पार्वती व्रत का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव की प्राप्ति से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसी कारण इसे कई जगह विजया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो महिलाएं पूरे विश्वास और नियमों के साथ यह व्रत करती हैं, उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार में खुशहाली और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं अविवाहित कन्याएं इस व्रत को अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना से करती हैं। यह व्रत शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

Jaya Parvati Vrat 2026 की पूजा विधि

व्रत के पहले दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद मिट्टी के पात्र में गेहूं या ज्वारा बोया जाता है, जिसकी पांच दिनों तक पूजा की जाती है। शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा की जाती है। पूजा में फूल, धूप, दीप, पांच प्रकार के फल और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर रेत या बालू से हाथी बनाकर उसकी पूजा करने की भी परंपरा है, जिसे शुभ माना जाता है।

पांच दिनों तक इन नियमों का करें पालन

जया पार्वती व्रत के दौरान दूसरे दिन से चौथे दिन तक प्रतिदिन ज्वारे की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु नमक रहित फलाहार ग्रहण करते हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती के मंत्रों का जाप करते हैं। अंतिम दिन रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। इसके बाद विधि-विधान के साथ व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।

निष्कर्ष

Jaya Parvati Vrat 2026 भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत माना जाता है। पांच दिनों तक श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से वैवाहिक जीवन में खुशहाली, परिवार में समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है। यदि आप भी यह व्रत कर रहे हैं, तो पूजा विधि और नियमों का पालन करते हुए पूरे विश्वास के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करें।

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