Lunar Eclipse 2026: अगस्त में लगने वाला आखिरी चंद्र ग्रहण, क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल

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Lunar Eclipse 2026: अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने सावन पूर्णिमा के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसे लेकर वैज्ञानिकों और स्काईवॉचर्स में खास उत्साह देखा जा रहा है। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन इसकी खास बात यह है कि इसमें चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में चला जाएगा और ब्लड मून जैसा दृश्य बनेगा। हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, फिर भी इसकी चर्चा दुनिया भर में होने वाली है।

Lunar Eclipse 2026 क्या है और क्यों है खास

Lunar Eclipse 2026 एक आंशिक चंद्र ग्रहण है, लेकिन इसकी खासियत इसे सामान्य ग्रहण से अलग बनाती है। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगी, जिससे चंद्रमा का रंग गहरा लाल या तांबे जैसा नजर आएगा। यही कारण है कि इसे ब्लड मून कहा जाता है। यह खगोलीय घटना लगभग 5 घंटे 39 मिनट तक चलेगी, जो इसे लंबा और देखने योग्य बनाती है। दुनियाभर के खगोल प्रेमियों के लिए यह एक शानदार मौका होगा, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में चंद्रमा का ढकना और उसका रंग बदलना बहुत कम देखने को मिलता है।

ग्रहण का समय और अवधि

इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत 01:23 UTC पर होगी, जो भारतीय समय के अनुसार 28 अगस्त सुबह लगभग 6:53 बजे होती है। ग्रहण का चरम समय 04:41 UTC पर रहेगा और इसकी समाप्ति 07:02 UTC पर होगी। कुल अवधि करीब 5 घंटे 39 मिनट की होगी, जिससे यह साल के लंबे ग्रहणों में शामिल होगा।

भारत में क्यों नहीं दिखेगा Lunar Eclipse 2026

भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा क्योंकि जब यह अपने मुख्य चरण में होगा, तब यहां दिन का समय रहेगा। चंद्र ग्रहण देखने के लिए रात का अंधेरा जरूरी होता है, लेकिन उस समय सूर्य का प्रकाश होने के कारण यह दृश्य भारत में संभव नहीं होगा।

ब्लड मून का वैज्ञानिक कारण

जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया अम्ब्रा से गुजरता है, तब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं और लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी वजह से चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” कहा जाता है।

कहां दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण

हालांकि भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इसे साफ देखा जा सकेगा। इनमें शामिल हैं:

  • उत्तरी अमेरिका
  • दक्षिण अमेरिका
  • यूरोप
  • अफ्रीका
  • ग्रीनलैंड
  • आइसलैंड
  • आर्कटिक क्षेत्र

इन स्थानों पर लोग इस खगोलीय घटना का पूरा आनंद ले सकेंगे।

2026 के अन्य ग्रहण और विशेष तथ्य

  • 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा, जो सावन अमावस्या के दिन होगा
  • यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा
  • वर्ष 2026 में कुल 13 पूर्णिमा पड़ेंगी, जो एक दुर्लभ स्थिति मानी जाती है
  • मई में अधिकमास के कारण दो ज्येष्ठ मास होंगे

भारत में सूतक काल का प्रभाव

चूंकि Lunar Eclipse 2026 भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव भी मान्य नहीं होगा। इसी कारण सूतक काल भी लागू नहीं माना जाएगा।

Disclaimer: यह लेख खगोलीय और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से है, किसी भी धार्मिक या व्यक्तिगत मान्यता के लिए स्वतंत्र निर्णय लें।

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