धमाल फ्रेंचाइज का नाम सुनते ही दर्शकों को साल 2007 वाली पहली फिल्म की शानदार कॉमेडी याद आ जाती है। इसी उम्मीद के साथ Dhamaal 4 Review सिनेमाघरों में पहुंची, लेकिन इस बार फिल्म वह जादू नहीं दिखा पाती जिसकी उम्मीद की जा रही थी। अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी जैसे दमदार कलाकार होने के बावजूद फिल्म की कमजोर कहानी, पुराने अंदाज के जोक्स और फीका स्क्रीनप्ले इसे साधारण बना देते हैं। अगर आप फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इसका पूरा रिव्यू जान लेना आपके लिए बेहतर रहेगा।
स्क्रीनप्ले और कॉमेडी नहीं छोड़ते खास असर
Dhamaal 4 Review की सबसे बड़ी कमजोरी इसका स्क्रीनप्ले और कॉमेडी है। फिल्म के कई जोक्स पुराने लगते हैं और कई सीन ऐसे हैं जो हंसी पैदा करने में पूरी तरह असफल रहते हैं। पहले धमाल की सबसे बड़ी ताकत उसकी फ्रेश कॉमेडी थी, लेकिन इस बार वही ऊर्जा और मनोरंजन गायब नजर आता है। जो कुछ अच्छे कॉमिक सीन हैं, उन्हें ट्रेलर में पहले ही दिखा दिया गया था, इसलिए थिएटर में वे भी ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ते।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष भी कमजोर
निर्देशक इंद्र कुमार ने पहले धमाल जैसी यादगार फिल्म दी थी, लेकिन इस बार निर्देशन उतना प्रभावशाली नहीं दिखता। कहानी की रफ्तार कई जगह धीमी हो जाती है और दर्शक फिल्म से जुड़ नहीं पाते। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं। हालांकि सिनेमैटोग्राफी अच्छी है और बैकग्राउंड म्यूजिक कुछ दृश्यों को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। इसके बावजूद तकनीकी पक्ष फिल्म की कमजोरियों को पूरी तरह छिपा नहीं पाता।
कहानी में फिर वही खजाने की तलाश

इस बार कहानी सौ साल पुराने छिपे हुए खजाने के इर्द-गिर्द घूमती है। समुद्री लुटेरा शैतान सिंह अंग्रेजों से खजाना लूटकर एक टापू पर छिपा देता है और उसका नक्शा तैयार करता है। कई साल बाद यह नक्शा पृथ्वी के हाथ लगता है, लेकिन समुद्री लुटेरा अधूरा उसे छीन लेता है। इसी दौरान नक्शा नष्ट हो जाता है, लेकिन मरने से पहले पृथ्वी खजाने का स्थान गुड्डू, लल्लन, आदी, मानव और कुछ अन्य लोगों को बता देता है। इसके बाद सभी खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं। कहानी में नया कुछ देखने को नहीं मिलता और कई जगह घटनाएं पहले से अनुमानित लगती हैं।
कलाकारों का अभिनय बचाता है फिल्म
अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा और उपेंद्र लिमये जैसे अनुभवी कलाकार अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय करते हैं। खासकर आदी और मानव की जोड़ी कई मौकों पर दर्शकों को हंसाने में सफल रहती है। हालांकि कमजोर स्क्रिप्ट की वजह से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिलता। ईशा गुप्ता का किरदार कहानी में खास असर नहीं छोड़ता, जबकि अंजलि आनंद का रोल भी दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाता।
गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक
फिल्म का संगीत औसत कहा जा सकता है। रीक्रिएट किए गए कुछ गाने सुनने में ठीक लगते हैं, लेकिन थिएटर से बाहर निकलने के बाद शायद ही कोई गाना याद रह जाए। बैकग्राउंड स्कोर कई जगह सीन को बेहतर बनाने की कोशिश करता है, लेकिन कमजोर कहानी के सामने इसका असर सीमित रह जाता है।
क्या Dhamaal 4 देखनी चाहिए?
अगर आप सिर्फ अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी की कॉमिक केमिस्ट्री देखने के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो आपको कुछ मनोरंजक पल मिल सकते हैं। लेकिन यदि आप पहली धमाल जैसी दमदार कहानी और लगातार हंसाने वाली कॉमेडी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है। फिल्म के अंत में अगले पार्ट का संकेत जरूर मिलता है, लेकिन उससे पहले फ्रेंचाइज को एक मजबूत कहानी की जरूरत है।
Dhamaal 4 Review: फाइनल वर्डिक्ट
Dhamaal 4 Review के आधार पर कहा जाए तो यह फिल्म अपनी लोकप्रिय फ्रेंचाइज का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। शानदार स्टारकास्ट होने के बावजूद कमजोर कहानी, पुराने जोक्स और साधारण स्क्रीनप्ले इसकी सबसे बड़ी कमियां हैं। यदि आप हल्की-फुल्की फैमिली कॉमेडी देखना चाहते हैं तो एक बार फिल्म देख सकते हैं, लेकिन बड़े मनोरंजन की उम्मीद करना सही नहीं होगा।
रेटिंग: 2/5 स्टार
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी और फिल्म समीक्षा के आधार पर तैयार किया गया है। फिल्म को लेकर दर्शकों की राय और अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं।
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