e-Vikas Portal: मध्य प्रदेश में हर खेती सीजन के दौरान खाद को लेकर किसानों की परेशानी किसी से छिपी नहीं रही। कई बार सहकारी समितियों के बाहर घंटों लंबी लाइनें लगती थीं और छोटे किसानों को समय पर खाद तक नहीं मिल पाती थी। इसी समस्या को खत्म करने के लिए अब राज्य सरकार ने एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में e-Vikas Portal लागू कर दिया गया है, जो AgriStack डेटाबेस से जुड़ा हुआ नया सिस्टम है। सरकार का दावा है कि इस तकनीक की मदद से किसानों को समय पर और बिना भागदौड़ के खाद उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
क्या है e-Vikas Portal?
e-Vikas Portal यानी Electronic Vikas Vitran Krishi Uravarak Aapurti Samadhan एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था को आसान बनाने के लिए शुरू किया है। यह सिस्टम AgriStack डेटाबेस पर आधारित है। जो किसान AgriStack में रजिस्टर्ड हैं, वे अपनी जरूरत के हिसाब से ऑनलाइन खाद बुक कर सकते हैं। किसान अपनी पसंद के रिटेलर को चुन सकते हैं और किस प्रकार की खाद चाहिए, यह भी तय कर सकते हैं। इससे किसानों को बार-बार समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को लंबी लाइनों और अफरा-तफरी से राहत मिलेगी। पहले कई किसानों को सिर्फ सीमित मात्रा में खाद मिल पाती थी, लेकिन अब ऑनलाइन टोकन सिस्टम के जरिए ज्यादा मात्रा में खाद आसानी से उपलब्ध हो रही है। विदिशा के किसान परवर सिंह राजपूत के मुताबिक, पहले जहां 3 से 4 बोरी खाद के लिए पूरा दिन इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब e-Vikas Portal से एक बार में 30 से 40 बोरी खाद आसानी से मिल रही है। इससे किसानों का समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं।
सरकार ने क्यों शुरू किया यह नया सिस्टम?
कृषि विभाग के अनुसार, खेती के सीजन में अचानक खाद की मांग बढ़ने से वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ लग जाती थी। सप्लाई और मांग के बीच अंतर होने के कारण छोटे किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती थी। इसी वजह से सरकार ने डिजिटल ट्रैकिंग और एडवांस बुकिंग व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सीजन शुरू होने से पहले ही खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि अंतिम समय में संकट की स्थिति पैदा न हो।
क्या खत्म हो जाएगी खाद की समस्या?
सरकार इस पोर्टल को खेती क्षेत्र में बड़ा सुधार मान रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल डिजिटल सिस्टम से पूरी समस्या खत्म नहीं होगी। अगर समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होगी, तो ऑनलाइन सिस्टम भी ज्यादा मदद नहीं कर पाएगा। तकनीक वितरण को आसान बना सकती है, लेकिन असली समाधान लगातार और पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना ही होगा। फिर भी शुरुआती स्तर पर यह पहल किसानों के लिए राहत देने वाली मानी जा रही है।
Disclaimer: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी योजना या पोर्टल से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी वेबसाइट जरूर देखें।
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